ग्रहों की मूल त्रिकोण राशियां? Kaun sa grah kis Rashi mein Mul trikon kahlata hai?
मूल त्रिकोण राशि क्या होती है?> किसी ग्रह की जिस राशि में वह अपने स्वगृह (Own Sign) में होते हुए भी सबसे अधिक शक्तिशाली और स्थिर फल देता है, उसे उस ग्रह की मूल त्रिकोण राशि कहा जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में कुछ राशियों को ग्रह की मूल त्रिकोण राशि मानी गई है बृहद पाराशर होरा शास्त्र में ऐसा लिखा है कि उच्च के बाद मूल त्रिकोण राशि में ही ग्रह सबसे ज्यादा शुभ होते हैं
यह स्थान उस ग्रह का मुख्य केंद्र या शक्ति का आधार क्षेत्र होता है — जहाँ वह अपने स्वभाव के अनुसार सबसे शुद्ध रूप में कार्य करता है।
—🪐 सभी ग्रहों की मूल त्रिकोण राशियाँग्रह स्वगृह राशि मूल त्रिकोण राशि डिग्री सीमा (जहाँ शक्ति सर्वाधिक होती है)
☉ सूर्य सिंह (Leo) सिंह (Leo) 0° – 20°
☽ चंद्रमा कर्क (Cancer) वृषभ (Taurus) 4° – 20°
♂ मंगल मेष, वृश्चिक मेष (Aries) 0° – 12°
☿ बुध मिथुन, कन्या कन्या (Virgo) 16° – 20°
♃ गुरु (बृहस्पति) धनु, मीन धनु (Sagittarius) 0° – 10°
♀ शुक्र वृषभ, तुला तुला (Libra) 0° – 15°
♄ शनि मकर, कुम्भ कुम्भ (Aquarius) 0° – 20°
☊ राहु कोई नहीं (छाया ग्रह) कोई निश्चित मूल त्रिकोण नहीं
☋ केतु कोई नहीं (छाया ग्रह) कोई निश्चित मूल त्रिकोण नहीं
—⚙️ कुछ विशेष बातेंमूल त्रिकोण राशि ग्रह की सर्वोत्तम स्थिति मानी जाती है — यहाँ वह अपने चरम गुण प्रदर्शित करता है।
स्वगृह में ग्रह स्थिर होता है, पर मूल त्रिकोण में वह कार्यशील और परिणामदायक होता है।जैसे सूर्य सिंह में स्वगृह और मूल त्रिकोण दोनों में है — इसलिए सूर्य का यह स्थान बहुत प्रभावशाली होता है।
