27 नक्षत्र उनके स्वामी और देवता के अनुसार हमारे ऊपर प्रभाव? by vedvarta

27 नक्षत्र उनके स्वामी और देवता के अनुसार हमारे ऊपर प्रभाव? by vedvarta

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वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा के मार्ग को 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक नक्षत्र का एक ग्रह स्वामी होता है, जो कर्म और मानसिक प्रवृत्ति दर्शाता है, तथा एक देवता होता है, जो उस नक्षत्र की आध्यात्मिक शक्ति और जीवन उद्देश्य का प्रतिनिधित्व करता है।
1. अश्विनी नक्षत्र
स्वामी: केतु
देवता: अश्विनी कुमार
अश्विनी नक्षत्र शीघ्रता, आरोग्य और नए आरंभ का प्रतीक है। इसके जातक ऊर्जावान, साहसी और सहायता करने वाले होते हैं। चिकित्सा और उपचार से इनका विशेष संबंध होता है।
2. भरणी नक्षत्र
स्वामी: शुक्र
देवता: यम
भरणी नक्षत्र धैर्य, जिम्मेदारी और जीवन-मरण के नियमों का प्रतीक है। इसके जातक गंभीर, कर्तव्यनिष्ठ और जीवन की गहराइयों को समझने वाले होते हैं।
3. कृतिका नक्षत्र
स्वामी: सूर्य
देवता: अग्नि
कृतिका नक्षत्र तेज, साहस और शुद्धिकरण का प्रतीक है। इसके जातक नेतृत्वकर्ता, स्पष्टवादी और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने वाले होते हैं।
4. रोहिणी नक्षत्र
स्वामी: चंद्रमा
देवता: प्रजापति (ब्रह्मा)
रोहिणी नक्षत्र सौंदर्य, सृजन और समृद्धि का नक्षत्र है। इसके जातक आकर्षक, भावुक और भौतिक सुखों की ओर प्रवृत्त होते हैं।
5. मृगशिरा नक्षत्र
स्वामी: मंगल
देवता: सोम
यह नक्षत्र जिज्ञासा, खोज और यात्रा का प्रतीक है। इसके जातक खोजी स्वभाव के, साहसी और चंचल मन वाले होते हैं।
6. आर्द्रा नक्षत्र
स्वामी: राहु
देवता: रुद्र
आर्द्रा नक्षत्र परिवर्तन और संघर्ष का प्रतीक है। इसके जातक तीव्र बुद्धि, भावनात्मक गहराई और असाधारण सोच रखते हैं।
7. पुनर्वसु नक्षत्र
स्वामी: गुरु
देवता: अदिति
पुनर्वसु नक्षत्र पुनर्जन्म, आशा और विस्तार का प्रतीक है। इसके जातक धर्मपरायण, सकारात्मक और मार्गदर्शक होते हैं।
8. पुष्य नक्षत्र
स्वामी: शनि
देवता: बृहस्पति
पुष्य को सर्वश्रेष्ठ नक्षत्रों में माना गया है। इसके जातक अनुशासनप्रिय, परिश्रमी और विश्वसनीय होते हैं।
9. आश्लेषा नक्षत्र
स्वामी: बुध
देवता: नाग
यह नक्षत्र रहस्य, चतुराई और रणनीति का प्रतीक है। इसके जातक तीक्ष्ण बुद्धि और प्रभावशाली वाणी वाले होते हैं।
10. मघा नक्षत्र
स्वामी: केतु
देवता: पितर
मघा नक्षत्र पूर्वजों, परंपरा और अधिकार का प्रतीक है। इसके जातक नेतृत्वप्रिय और कुल गौरव से जुड़े होते हैं।
11. पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र
स्वामी: शुक्र
देवता: भग
यह नक्षत्र आनंद, प्रेम और विवाह का प्रतीक है। इसके जातक विलासप्रिय और कलात्मक होते हैं।
12. उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र
स्वामी: सूर्य
देवता: अर्यमा
यह नक्षत्र स्थायित्व और सामाजिक जिम्मेदारी दर्शाता है। इसके जातक न्यायप्रिय और प्रतिष्ठित होते हैं।
13. हस्त नक्षत्र
स्वामी: चंद्रमा
देवता: सविता
हस्त नक्षत्र कौशल, कर्म और नियंत्रण का प्रतीक है। इसके जातक कार्यकुशल और बुद्धिमान होते हैं।
14. चित्रा नक्षत्र
स्वामी: मंगल
देवता: त्वष्टा
चित्रा नक्षत्र रचनात्मकता और सौंदर्य का प्रतीक है। इसके जातक कलाकार, डिजाइनर और नवाचारी होते हैं।
15. स्वाती नक्षत्र
स्वामी: राहु
देवता: वायु
स्वाती नक्षत्र स्वतंत्रता और गतिशीलता दर्शाता है। इसके जातक स्वतंत्र विचारों वाले और व्यापारिक होते हैं।
16. विशाखा नक्षत्र
स्वामी: गुरु
देवता: इंद्र-अग्नि
यह नक्षत्र लक्ष्य प्राप्ति और महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। इसके जातक दृढ़ निश्चयी होते हैं।
17. अनुराधा नक्षत्र
स्वामी: शनि
देवता: मित्र
अनुराधा नक्षत्र मित्रता और सहयोग का प्रतीक है। इसके जातक सामाजिक और निष्ठावान होते हैं।
18. ज्येष्ठा नक्षत्र
स्वामी: बुध
देवता: इंद्र
यह नक्षत्र वरिष्ठता और संरक्षण का प्रतीक है। इसके जातक नेतृत्व और प्रशासन में कुशल होते हैं।
19. मूल नक्षत्र
स्वामी: केतु
देवता: निर्ऋति
मूल नक्षत्र विनाश और पुनर्निर्माण का प्रतीक है। इसके जातक सत्य की खोज में जीवन को उलट-पलट देते हैं।
20. पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र
स्वामी: शुक्र
देवता: आपः
यह नक्षत्र विजय और आत्मविश्वास का प्रतीक है। इसके जातक प्रभावशाली वक्ता होते हैं।
21. उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
स्वामी: सूर्य
देवता: विश्वदेव
यह नक्षत्र स्थायी सफलता और धर्म का प्रतीक है। इसके जातक आदर्शवादी होते हैं।
22. श्रवण नक्षत्र
स्वामी: चंद्रमा
देवता: विष्णु
श्रवण नक्षत्र ज्ञान, शिक्षा और श्रवण शक्ति का प्रतीक है। इसके जातक विद्वान और धार्मिक होते हैं।
23. धनिष्ठा नक्षत्र
स्वामी: मंगल
देवता: वसु
यह नक्षत्र धन, संगीत और प्रसिद्धि का प्रतीक है। इसके जातक ऊर्जावान और प्रसिद्ध होते हैं।
24. शतभिषा नक्षत्र
स्वामी: राहु
देवता: वरुण
यह नक्षत्र रहस्य और उपचार का प्रतीक है। इसके जातक शोधकर्ता और चिकित्सक होते हैं।
25. पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र
स्वामी: गुरु
देवता: अजैकपाद
यह नक्षत्र उग्रता और तप का प्रतीक है। इसके जातक गंभीर और दार्शनिक होते हैं।
26. उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र
स्वामी: शनि
देवता: अहिर्बुध्न्य
यह नक्षत्र गहराई, त्याग और स्थिरता का प्रतीक है। इसके जातक शांत और आध्यात्मिक होते हैं।
27. रेवती नक्षत्र
स्वामी: बुध
देवता: पूषा
रेवती नक्षत्र पूर्णता, संरक्षण और यात्रा का प्रतीक है। इसके जातक करुणामय, मार्गदर्शक और सफल होते हैं।
निष्कर्ष
नक्षत्र, उनके स्वामी और देवता मानव जीवन के मानसिक, कर्मिक और आध्यात्मिक पक्षों को समझने का सशक्त माध्यम हैं। कुंडली विश्लेषण में नक्षत्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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