प्रमाण कितने है? Praman kya h? Darshan mein?

भारतीय दर्शन में प्रमाण का अर्थ है — ज्ञान प्राप्त करने के विश्वसनीय साधन।

सामान्यतः (विशेषकर न्याय–मीमांसा परंपरा में) प्रमाण 6 प्रकार के माने गए हैं:

✅ 1. प्रत्यक्ष प्रमाण (Pratyaksha)

जो ज्ञान इंद्रियों से सीधे मिले।

👉 जैसे: आँख से पेड़ देखना, कान से आवाज सुनना।

✅ 2. अनुमान प्रमाण (Anumana)

किसी संकेत से निष्कर्ष निकालना।

👉 जैसे: धुआँ देखकर आग का अनुमान।

✅ 3. उपमान प्रमाण (Upamana)

तुलना से ज्ञान प्राप्त करना।

👉 जैसे: किसी ने बताया “गाय जैसा जानवर नीलगाय है” — फिर जंगल में देखकर पहचान लेना।

✅ 4. शब्द प्रमाण (Shabda / आगम)

विश्वसनीय व्यक्ति या शास्त्र के वचन से ज्ञान।

👉 जैसे: वेद, गुरु या वैज्ञानिक की बात मानना।

✅ 5. अर्थापत्ति प्रमाण (Arthapatti)

जब बिना माने बात समझ में न आए तो नया अर्थ मानना पड़े।

👉 जैसे: कोई कहे — “राम दिन में नहीं खाता, फिर भी मोटा है”

तो मानना पड़ेगा कि वह रात में खाता होगा।

✅ 6. अनुपलब्धि प्रमाण (Anupalabdhi)

किसी वस्तु के न होने का ज्ञान।

👉 जैसे: कमरे में देखकर कहना — “यहाँ घड़ा नहीं है।”

 

📚 विभिन्न दर्शनों में प्रमाणों की संख्या

दर्शन

प्रमाण

चार्वाक

केवल 1 — प्रत्यक्ष

बौद्ध

2 — प्रत्यक्ष, अनुमान

वैशेषिक

2 — प्रत्यक्ष, अनुमान

न्याय

4 — प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द

मीमांसा

6 — (न्याय के 4 + अर्थापत्ति + अनुपलब्धि)

वेदांत

6

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