संपूर्ण नवग्रह मंडल, अधिदेवता, प्रत्यधिदेवता,5 लोकपाल,दस दिगपाल

संपूर्ण नवग्रह मंडल
ग्रहों के आवाहन एवं हवन के लिए नामावली आपके सामने प्रस्तुत है जिसके आधार पर आप हवन या नाम से आवाहन देवताओं का कर सकते हैं
 
शिवः शिवा गुहो विष्णुर्ब्रह्मेन्द्रयमकालकाः।
 चित्रगुप्तोऽथ भान्वादे र्दक्षिणे चाधिदेवताः।। (स्कन्द पुराण)
अग्निरापो धरा विष्णुः शक्रेन्द्राणी पितामहाः।
पन्नगाः क: क्रमाद्वामे ग्रहप्रत्यधिदेवताः।।
गणेशः च अम्बिका वायु आकाशः च अश्विनौ तथा
ग्रहाणां उत्तरे पंच लोक पालाः प्रकीर्तिताः।।
 
संपूर्ण नवग्रह मंडल
नवग्रह मंडल में कुल वास्तु और क्षेत्रपाल को जोड़कर के 44 देवता होते हैं
जो ग्रह के दाहिने हाथ में होते हैं वह अधि देवता जो ग्रह के वाम में हाथ में होते हैं प्रतिअधि देवता कहलाते हैं
पांच लोकपाल के स्थान निश्चित रहते हैं और 10 दिगपाल परिधि के बाहर दसों दिशाओं की रक्षा करते हैं वास्तु
और क्षेत्रपाल गुरु के उत्तर भाग में होते हैं अर्थात बुध के पास में दाहिने हाथ में स्थान रहता है
 
नवग्रह (9 ग्रह देवता)
सूर्य
चंद्र
मंगल
बुध
गुरु (बृहस्पति)
शुक्र
शनि
राहु
केतु
 
नवग्रहों के अधिदेवता
सूर्य ईश्वराय
चंद्र भगवान गौरी/पार्वती
मंगल भगवान स्कंद (कार्तिकेय)
बुध विष्णु
गुरु ब्रह्मा
शुक्र इंद्र
शनि यमराज
राहु काल
केतु चित्रगुप्त
 
 नवग्रहों के प्रत्यधिदेवता
सूर्य अग्नि
चंद्र अप (जल देवता)
मंगल पृथ्वी
बुध विष्णु
गुरु इंद्र
शुक्र इंद्राणी
शनि प्रजापति
राहु सर्प
केतु ब्रह्मा
 
 पंच लोकपाल (5 लोकपाल)
गणेशजी
दुर्गाजी
वायु
आकाश
अश्विनीकुमार
 
दस दिगपाल (10 दिशाओं के रक्षक)
नवग्रह मंडल के परिधि के बाहर 10 दिगपाल की स्थापना
पूर्व      इंद्र
आग्नेय  अग्नि
दक्षिण  यम
नैऋत्य  नैऋति
पश्चिम  वरुण
वायव्य  वायु
उत्तर  कुबेर
ईशान  ईशान (शिव)
ऊर्ध्व  ब्रह्मा
अधो  अनंत (शेषनाग)

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