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प्रमाण कितने है? Praman kya h? Darshan mein?
भारतीय दर्शन में प्रमाण का अर्थ है — ज्ञान प्राप्त करने के विश्वसनीय साधन। सामान्यतः (विशेषकर न्याय–मीमांसा परंपरा में) प्रमाण 6 प्रकार के माने गए हैं: ✅ 1. प्रत्यक्ष प्रमाण (Pratyaksha) जो ज्ञान इंद्रियों से सीधे मिले। 👉 जैसे: आँख से पेड़ देखना, कान से आवाज सुनना। ✅ 2. अनुमान प्रमाण (Anumana) किसी संकेत से…
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षट् दर्शन (Six Schools of Indian Philosophy)
षट् दर्शन (Six Schools of Indian Philosophy) षट् दर्शन (Six Schools of Indian Philosophy) भारतीय दर्शन की छह प्रमुख आस्तिक परंपराएँ हैं, जो वेदों की प्रामाणिकता को स्वीकार करती हैं। इन्हें मिलकर षट् दर्शन कहा जाता है: 1. न्याय दर्शन प्रवर्तक: गौतम ऋषि विषय: तर्क, प्रमाण (प्रमाण शास्त्र) लक्ष्य: सही ज्ञान से दुःख का नाश…
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ज्योतिष में कुंडली का पंचम भाव by Vedvarta astro anoop tripathi
कुंडली का पंचम भाव (5th House) संतान, रचनात्मकता, प्रेम, मनोरंजन, उच्च शिक्षा, और पूर्व जन्मों के पुण्य कर्मों (संचित कर्म) को दर्शाता है, इसे सुख भाव भी कहते हैं; यह बुद्धि, एकाग्रता, और आत्म-अभिव्यक्ति का भी प्रतीक है, जो व्यक्ति की खुशी, प्रतिभाओं और आनंद खोजने की क्षमता बताता है। इस भाव में ग्रहों का…
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ब्राह्मणों के लिए गायत्री का महत्व ? Gayatri importance for Brahman
गायत्रीसे रहित ब्राह्मण निन्दनीय है जो ब्राह्मण उपनयन संस्कार होनेके बाद गायत्रीकी उपासना (जप) करता है, वह परम पवित्र ब्राह्मण कहा जाता है और जो गायत्रीकी उपासना नहीं करता, वह परम अपवित्र ब्राह्मण कहा जाता है। ‘गायत्रीरहितो विप्रः शूद्रादप्यशुचिर्भवेत् ।’ (पाराशरस्मृति ८।३२) ‘गायत्रीसे रहित ब्राह्मण अधिक अपवित्र होता है।’ गायत्रीसे रहित ब्राह्मणके बारेमें तो यहाँ…
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